IMG 20250812 135225

आदेश: शिक्षकों को चिकित्सा अवकाश स्वीकृति प्रधानाध्यापक द्वारा 

आदेश: शिक्षकों को चिकित्सा अवकाश स्वीकृति प्रधानाध्यापक द्वारा 


हाइलाइट्स

  • उत्तराखंड शासन ने माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के 15 दिन तक के चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) की स्वीकृति का अधिकार प्रधानाचार्य को दिया।

  • पहले इन अवकाशों की स्वीकृति के लिए जिला शिक्षा अधिकारी या उच्च स्तर पर प्रकरण भेजना पड़ता था।

  • निर्णय का उद्देश्य — विषम भौगोलिक परिस्थितियों में समय पर अवकाश स्वीकृति और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करना।

  • आदेश 12 अगस्त 2025 को सचिव रविनाथ रामन के हस्ताक्षर से जारी।

  • यह स्वीकृति केवल राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए लागू होगी।


क्या है आदेश का मुख्य प्रावधान?

उत्तराखंड शासन, माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि:

  • अब किसी भी राजकीय माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक के 15 दिन तक के चिकित्सा अवकाश को संंबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य स्वीकृत कर सकेंगे।

  • यह व्यवस्था प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और शिक्षकों के मामलों के समयबद्ध निस्तारण को देखते हुए लागू की गई है।

  • प्रस्ताव महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखंड के पत्र (04 जनवरी 2025) के आधार पर सरकार ने मंजूर किया है।


पहले और अब में अंतर

पहलूपहले की व्यवस्थानई व्यवस्था
स्वीकृति प्राधिकरणजिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या उच्च स्तरविद्यालय के प्रधानाचार्य
अवधिचिकित्सा अवकाश किसी भी अवधि का — पूरी फाइल ऊपर भेजनी होती थीकेवल 15 दिन तक का मेडिकल लीव प्रधानाचार्य सीधे स्वीकृत करेंगे
समय-सीमाकई बार 1-2 हफ्ते की देरीतुरंत / विद्यालय स्तर पर

इस कदम से होने वाले फायदे

  1. समय की बचत – शिक्षक को चिकित्सकीय कारण से अवकाश के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

  2. आपात अवकाश में सहूलियत – बीमार पड़ने पर तुरंत प्रधानाचार्य से छुट्टी मिल सकेगी।

  3. दूरस्थ / पहाड़ी क्षेत्रों के शिक्षकों को राहत – कागजी कार्यवाही के लिए जिला/मुख्यालय चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

  4. शासन-प्रशासन का बोझ कम – छोटे स्तर के अवकाश के लिए ऊपरी कार्यालय पर दबाव घटेगा।


आदेश से जुड़े बिंदु

  • यह व्यवस्था केवल 15 दिन तक के चिकित्सा अवकाश पर लागू है।

  • लंबे अवकाश (15 दिन से अधिक) के लिए पहले की तरह उच्च प्राधिकरण की ही स्वीकृति जरूरी रहेगी।

  • शासनादेश के अंतर्गत सभी प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी, निदेशक और कोषाधिकारी को आदेश की जानकारी दी गई है।


यह निर्णय शिक्षकों के हित में एक त्वरित राहतकारी कदम है, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जहां भौगोलिक कठिनाइयों के कारण छोटे-छोटे कार्य में भी विलंब हो जाता है। अब एक सीमित अवधि के लिए शिक्षण कार्य से अनुपस्थिति की स्वीकृति सीधे विद्यालय स्तर पर मिल सकेगी, जिससे प्रशासनिक जटिलताओं में कमी और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *