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आयु सीमा के मानकों की अनदेखी पर स्कूलों की मान्यता रद्द : शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

आयु सीमा के मानकों की अनदेखी पर स्कूलों की मान्यता रद्द : शिक्षा विभाग का सख्त आदेश

हाइलाइट्स

  • उत्तराखंड के शिक्षा सचिव ने कक्षा एक में प्रवेश की न्यूनतम आयु सीमा 6 वर्ष अनिवार्य करने का आदेश जारी किया

  • आयु सीमा का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी

  • आदेश के अनुसार, बच्चे की उम्र 1 जुलाई से पहले 6 वर्ष पूरी होनी चाहिए

  • पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए – प्री-स्कूल-1: 3 वर्ष, प्री-स्कूल-2: 4 वर्ष, प्री-स्कूल-3: 5 वर्ष

  • शिक्षा विभाग ने सभी सीईओ और निदेशकों को सख्त निर्देश दिए, आरटीई एक्ट का पालन अनिवार्य

आदेश का विवरण

उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की आयु सीमा के उल्लंघन पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने संबंधी आदेश जारी किया है। शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने स्पष्ट किया कि नर्सरी, प्री-प्राइमरी, और कक्षा एक में प्रवेश के लिए निर्धारित आयु सीमा का हर स्कूल पालन करे, अन्यथा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।

अब कक्षा एक में सिर्फ वही बच्चे प्रवेश पा सकेंगे, जिनकी आयु शैक्षणिक सत्र में 1 जुलाई तक छह साल पूरी हो चुकी हो। पहले यह सीमा 1 अप्रैल थी, जिसे संशोधित किया गया।

प्री-प्राइमरी की प्रत्येक कक्षा के लिए आयु सीमा तय है:

  • प्री-स्कूल-1 (PPI): न्यूनतम 3 वर्ष

  • प्री-स्कूल-2 (PPII): न्यूनतम 4 वर्ष

  • प्री-स्कूल-3 (PPIII): न्यूनतम 5 वर्ष

  • कक्षा एक (Class 1): न्यूनतम 6 वर्ष

क्यों जरूरी है आयु सीमा का पालन?

RTE एक्ट 2009 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तय आयु सीमा का पालन बच्चों के मानसिक और शैक्षिक विकास के लिए अनिवार्य है। उम्र से छोटे बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश देने से उनके ऊपर अधिक पढ़ाई का दबाव पड़ता है और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर होता है.

स्कूलों के लिए इस नियम का पालन करना कानूनी तौर पर आवश्यक है। अगर किसी स्कूल ने आयु सीमा का उल्लंघन किया, तो उसकी मान्यता रद्द करने के साथ ही कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा.

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

  • स्कूल: सही आयु सीमा के आधार पर ही प्रवेश लें; प्रवेश रजिस्टर की सत्यता सुनिश्चित करें

  • अभिभावक: प्रवेश के समय बच्चे की उम्र तय मानकों के अनुसार हो; दस्तावेज़ के प्रमाण जरूर रखें

  • निजी स्कूल: सिर्फ फीस वसूलने के मकसद से उम्र से छोटे बच्चों को दाखिला न दें

वर्तमान नियम के कारण अब कई बच्चे निर्धारित उम्र न होने पर एक वर्ष तक स्कूल प्रवेश के लिए इंतजार करेंगे. इससे प्राथमिक स्कूलों में नामांकन घट सकता है, लेकिन बच्चों के हित में यह बदलाव जरूरी है. शिक्षक समाज जरूरी संशोधन के लिए सुझाव दे रहा है.

उत्तराखंड में कक्षा एक में प्रवेश की न्यूनतम आयु छह वर्ष तय कर दी गई है, जो शैक्षिक सत्र से एक जुलाई तक पूरी होनी चाहिए। इन मानकों की अनदेखी पर स्कूलों की मान्यता रद्द होगी और स्कूलों को विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह आदेश बच्चों के सम्पूर्ण विकास और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम है।

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