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प्रधानाचार्य सीधी भर्ती के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन: 10 अगस्त से चॉकडाउन हड़ताल

प्रधानाचार्य सीधी भर्ती के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन: 10 अगस्त से चॉकडाउन हड़ताल

हाइलाइट्स

  • 10 अगस्त से राजकीय शिक्षक संघ करेगा राज्यव्यापी चॉकडाउन हड़ताल

  • प्रधानाचार्य पद पर 50% सीधी भर्ती के कैबिनेट फैसले का विरोध

  • शिक्षक संघ की मांग, प्रधानाचार्य पद केवल पदोन्नति के जरिए ही भरे जाएं

  • नई नियमावली के तहत राज्य लोक सेवा आयोग को सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

  • हड़ताल से प्रदेश के सैकड़ों विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका

  • प्रधानाचार्य सीधी भर्ती समर्थक मंच ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया

क्या है मामला?

उत्तराखंड में राजकीय शिक्षक संघ ने 10 अगस्त 2025 से “चॉकडाउन” हड़ताल का ऐलान कर दिया है। शिक्षक संघ प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 50 फीसदी पदों पर सीधी भर्ती के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहा है। वे चाहते हैं कि सभी रिक्त प्रधानाचार्य पद केवल पदोन्नति के आधार पर ही भरे जाएं, जैसा पहले होता रहा है।

पृष्ठभूमि और विवाद का कारण

सरकार का निर्णय:

  • राज्य कैबिनेट ने हाल ही में माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 50% पदों पर सीधी भर्ती के लिए संशोधित नियमावली को मंजूरी दी है।

  • शेष 50% पद (आंतरिक पदोन्नति) के लिए भी योग्यता संबंधी मानकों को संशोधित किया गया।

  • सरकार का तर्क है कि प्रधानाचार्य के लगभग 1,180 से अधिक पद लंबे समय से खाली हैं और गुणवत्ता व वरिष्ठता दोनों का समावेश जरूरी है।

शिक्षक संघ के तर्क:

  • प्रधानाचार्य पद पर सीधी भर्ती करने से वरिष्ठता और अनुभव की अनदेखी होगी।

  • वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे अनुभवी प्रवक्ताओं का हक छिन जाएगा।

  • विभाग में अभी भी शिक्षक और प्रधानाचार्य के अधिकांश पद खाली हैं, इससे अतिरिक्त अस्थिरता बढ़ेगी।

  • यह निर्णय शिक्षकों के हित और शैक्षणिक व्यवस्था के विपरीत है।

संघ की प्रमुख मांगे

  1. प्रधानाचार्य के सभी पद केवल पदोन्नति से भरे जाएं।

  2. प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती प्रक्रिया को सरकार तत्काल निरस्त करे।

  3. शिक्षक तबादलों का लंबित मामला तत्काल निपटाया जाए।

  4. शिक्षकों का कहना है – “वरिष्ठता ही श्रेष्ठता”। वर्षों की सेवाओं की अनदेखी न हो।

सरकार का पक्ष

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है:

“सीधी भर्ती नियमावली में संशोधन से राज्य के 15,000 शिक्षकों को श्रेष्ठता के आधार पर पदोन्नति का मौका मिलेगा। योग्य-विपुल युवाओं को नए अवसर भी मिलेंगे।”

समर्थक शिक्षक मंच का मत

  • समर्थक मंच के संयोजक कमलेश मिश्रा की राय है कि, “सीधी भर्ती के निर्णय में वरिष्ठता और श्रेष्ठता, दोनों का संतुलन है। लंबे समय से रिक्त पद भर सकेंगे और माध्यमिक विद्यालयों को बेहतर प्रशासन मिल पाएगा।”

आंदोलन का असर

  • प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रभावित होने का अंदेशा।

  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में सबसे अधिक असर।

  • बच्चों की पढ़ाई और व्यवस्थापन कार्य अटक सकते हैं।

  • अभिभावकों में भी असमंजस बढ़ा, सरकार और संघ में टकराव जारी।

शिक्षक संघ का रुख

संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान का कहना है:

“पदोन्नति से ही प्रधानाचार्य बनने का अधिकार होना चाहिए। हम चाहते हैं कि सरकार शिक्षक हित में पुराना आदेश लागू करे। वरिष्ठता का सम्मान होना चाहिए।”

उत्तराखंड में प्रधानाचार्य सीधी भर्ती को लेकर शिक्षक संघ और सरकार आमने-सामने हैं। सरकार का दावा है कि नई नीति से गुणवत्तापूर्ण चयन होगा, वहीं शिक्षक संघ वरिष्ठ शिक्षकों की उपेक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर सशंकित है। आगामी दिनों में हड़ताल और विरोध के कारण प्रदेश में शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। स्थितियों पर नजर रखते हुए हर पक्ष को संवाद और समाधान का रास्ता अपनाना होगा।

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