शिक्षकों का चाॅक डाउन दूसरे दिन भी जारी
न्यूज़ डेस्क । प्रधानाचार्य सीधी भर्ती को रद्द किए जाने, शिक्षकों की पदोन्नति किये जाने, शिक्षकों के स्थानान्तरण किये जाने की मांग को लेकर आज राजकीय शिक्षक संघ की प्रान्तीय कार्यकारिणी के आह्वान पर दूसरे दिन भी समस्त राजकीय शिक्षक चाॅक डाउन कर शिक्षण कार्य से विरत रहे। आज के कार्यक्रम में राजकीय शिक्षक संघ जिला अध्यक्ष अल्मोड़ा भूपाल सिंह चिलवाल,जिला मंत्री राजू मेहरा,जिला उपाध्यक्ष मदन भंडारी, जिला महिला उपाध्यक्ष मीनाक्षी जोशी,जिला संयुक्त मंत्री प्रकाश भट्ट, जिला संयुक्त मंत्री महिला राधा लसपाल नबियाल,जिला संगठन मंत्री जीवन नेगी, जिला संगठन मंत्री महिला लता वर्मा, जिला आय व्यय निरीक्षक चंदन रावत,पूर्व जिला अध्यक्ष हीरा बोरा,पूर्व जिला अध्यक्ष भारतेंदु जोशी,पूर्व मंडलीय मंत्री डॉ कैलाश डोलिया, दीप पांडे, बी डी पांडेय, डॉ प्रवेश जोशी,दीप जोशी,पंकज टम्टा, बाला दत्त शर्मा, मनमोहन देव, प्रियंका शर्मा, अखिलेश बिष्ट, त्रिभुवन बिष्ट, नितेश काण्डपाल, त्रिवेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र गोस्वामी, मेघा मनराल, केसर सिंह, जीवन लाल साह, लक्ष्मण सिंह रावत, नन्दकिशोर आर्य, प्रकाश चन्द्र डाॅर्बी, मीना गोस्वामी, चन्द्रशेखर पाण्डेय सहित जनपद के समस्त राजकीय शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
क्या कहते हैं शिक्षक प्रतिनिधि
वर्षों से शिक्षा विभाग में विभाग की अनदेखी और उदासीनता के कारण शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो पाई है जो कि शिक्षकों के अधिकारों पर कुठाराघात है। अन्य विभागों में पदोन्नति बरोबर होते रहती है। वर्तमान में प्रधानाचार्य सीधी भर्ती के लिए विभाग द्वारा आवेदन मांगे जा रहे हैं जो कि अन्यायपूर्ण व मानसिक रूप से भी शोषणकारी कार्य है।
प्रधानाचार्य के पद शत प्रतिशत पदोन्नति द्वारा भरे जाने चाहिए जिससे विभाग के वरिष्ठ साथियों को पूर्व की भांति पदोन्नति का लाभ मिल सके।
इसी के विरोध में राजकीय शिक्षक संगठन ने 18 अगस्त से मांग पूरी नहीं होने तक अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार/ चौकडाउन हड़ताल करने का फैसला लिया है

त्रिभुवन सिंह बिष्ट ब्लॉक अध्यक्ष राशिसं धौलादेवी
शासन एवं शिक्षा विभाग दोनों का राजकीय शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार से कुपित होकर राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड को आंदोलन करने पर विवश होना पड़ा है। 2019 से किसी भी स्तर पर कोई पदोन्नति नही हुई है। कई शिक्षक पदोन्नति की राह देखते देखते सेवानिवृत्त हो गए हैं। छठे वेतन आयोग की वेतन विसगीतियों का आज तक समाधान नही किया गया है। 7 वर्ष वरिष्ठ शिक्षक अपने से कनिष्ठ शिक्षकों के कम वेतन पा रहा हैं। प्रधानाचार्य सीधी भर्ती की विज्ञप्ति जारी कर विभाग एवं शासन द्वारा शिक्षकों को आपस में लड़ाने का कार्य किया जा रहा है जो कि अति निंदनीय है।




