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उत्तराखंड के अल्मोड़ा का निवासी युवक ISI के लिए जासूसी करते पकड़ा गया, खुफिया विभाग में हड़कंप

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अल्मोड़ा, 13 अगस्त 2025: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के भैसियाछाना ब्लॉक के प्लयू गांव निवासी महेंद्र प्रसाद को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह युवक रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के गेस्ट हाउस में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। खुफिया एजेंसियों ने उसे भारतीय सेना और डीआरडीओ से संबंधित संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में हिरासत में लिया है। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।

जैसलमेर पुलिस और सीआईडी ने संयुक्त कार्रवाई में महेंद्र को चंदन फील्ड फायरिंग रेंज स्थित डीआरडीओ गेस्ट हाउस से गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि वह इंटरनेट मीडिया के जरिए सीधे आईएसआई के संपर्क में था और लंबे समय से भारतीय सेना की गतिविधियों, मिसाइल परीक्षणों और हथियारों से जुड़ी गोपनीय जानकारी पाकिस्तान को भेज रहा था। चंदन फील्ड फायरिंग रेंज सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

गांव में सन्नाटा, ग्रामीण हैरान

घटना की जानकारी जैसे ही महेंद्र के गांव प्लयू पहुंची, वहां के लोग स्तब्ध रह गए। ग्रामीणों के अनुसार, महेंद्र कई साल पहले नौकरी के लिए राजस्थान चला गया था और उसका गांव आना-जाना बहुत कम हो गया था। करीब ढाई-तीन साल पहले उसने अपने पिता चंदन राम और भाई को दिल्ली में नौकरी दिलाई थी, जबकि वह स्वयं राजस्थान में रह रहा था। गांव में रहने वाले उसके चाचा दीवान राम का भी उससे कोई संपर्क नहीं था। ग्रामीण इस घटना से अपने को अलग बता रहे हैं।

खुफिया एजेंसियां सतर्क, जांच तेज

इस गिरफ्तारी के बाद स्थानीय और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। वे यह पता लगाने में जुटी हैं कि महेंद्र के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे। इस घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। खुफिया विभाग मामले की गहन जांच कर रहा है ताकि इस नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों का पता लगाया जा सके।

अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देवेंद्र पींचा ने कहा, “मुझे इस मामले में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। जैसे ही निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल

महेंद्र की गिरफ्तारी ने एक बार फिर रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। यह घटना संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच और निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। खुफिया एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि महेंद्र ने किन-किन जानकारियों को लीक किया और उसका नेटवर्क कितना व्यापक  है।

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