Allahabad high court

कंप्यूटर विषय में नॉन-बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक: हाईकोर्ट

कंप्यूटर विषय में नॉन-बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक: हाईकोर्ट


हाइलाइट्स

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर विषय की एलटी ग्रेड भर्ती में नॉन-बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगाई।

  • कोर्ट के अनुसार राज्य के छठे संशोधन नियम (2024) और उस पर आधारित विज्ञापन में बीएड को वांछनीय बताना NCTE की 12 नवम्बर 2014 अधिसूचना के विपरीत है।

  • चयन प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, पर नॉन-बीएड की नियुक्ति कोर्ट की अनुमति के बिना नहीं होगी; अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को निर्धारित।

मूल विवाद

उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर विषय की एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) भर्ती प्रक्रिया में यूपी सरकार ने 2024 के ‘षष्टम संशोधन नियम’ और 28 जुलाई 2025 के विज्ञापन के जरिए बीएड की अनिवार्यता हटाकर उसे केवल “वरीयता” की श्रेणी में रखा था। इसके विरोध में जौनपुर निवासी प्रवीन मिश्रा व अन्य ने हाइकोर्ट मे  याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि यह नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना के खिलाफ है। उस अधिसूचना के अनुसार, कक्षा 9-10 (माध्यमिक स्तर) के सभी शिक्षक पदों के लिए बीएड डिग्री अनिवार्य योग्यता है.


अदालत में क्या हुआ

  • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य नियमों/सरकारी विज्ञापन में बीएड को वरीयता बनाना NCTE के केंद्रीय नियमों के अनुरूप नहीं है।

  • राज्य सरकार ने जवाब दिया कि पूर्व भर्ती में बीएड धारकों की कमी के कारण कई पद खाली रह गए, छात्रों के हित में अधिक योग्यताओं को शामिल कर भर्ती की राह आसान बनानी पड़ी।

  • हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलें नामंजूर करते हुए कहा कि NCTE की अधिसूचना बाध्यकारी है, जिसमें मध्यमिक शिक्षक के लिए बीएड जरूरी है और योग्यता में छूट देना गुणवत्ता और कानून, दोनों के खिलाफ है।

  • कोर्ट ने भर्ती की प्रक्रिया तो चालू रहने दी, लेकिन फैसला आने तक नॉन-बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी.


मामले का महत्व

यह मामला शिक्षा की गुणवत्ता, राष्ट्रीय योग्यता मानकों और राज्य भर्ती नियमों के टकराव से जुड़ा है। कोर्ट का फैसला हजारों अभ्यर्थियों और प्रदेश भर के स्कूलों की कंप्यूटर शिक्षा में प्रत्यक्ष असर डाल सकता है। आगामी सुनवाई में राज्य सरकार को दो सप्ताह में जवाब देने की मोहलत दी गई है।

आदेश का सार

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) के सभी अध्यापक पदों के लिए बीएड न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है, जिसे राज्य नियमों/विज्ञापन से कम नहीं किया जा सकता। इसलिए कंप्यूटर विषय में बीएड को “केवल वरीयता” बनाना prima facie नियम-विरुद्ध माना गया। अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करते हुए योग्यता में छूट देना उचित नहीं है।


भर्ती पर तात्कालिक प्रभाव

  • लिखित परीक्षा/दस्तावेज़ सत्यापन जैसी चयन प्रक्रियाएं जारी रखी जा सकती हैं, ताकि प्रशासनिक टाइमलाइन न अटके।

  • परन्तु कंप्यूटर विषय में नॉन-बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक रहेगी—किसी भी नियुक्ति के लिए कोर्ट की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।

  • जिन अभ्यर्थियों के पास बीएड है, उन पर रोक लागू नहीं है; उनका केस सामान्य नियमों के अनुरूप आगे बढ़ सकता है।


याचिकाकर्ता की दलील बनाम राज्य का पक्ष

  • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि NCTE 2014 अधिसूचना माध्यमिक स्तर पर बीएड अनिवार्य ठहराती है; राज्य इसे घटाकर “वांछनीय” नहीं कर सकता।

  • राज्य ने पिछली भर्तियों में बीएड योग्य अभ्यर्थियों की कमी और रिक्तियां भरने के सार्वजनिक हित का हवाला दिया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया और NCTE की बाध्यकारी प्रकृति दोहराई।


अभ्यर्थियों के लिए सुझाव

  • कंप्यूटर विषय के नॉन-बीएड उम्मीदवार: अगली सुनवाई तक नियुक्ति नहीं हो पाएगी; यदि बीएड करने/समकक्ष योग्यता सिद्ध करने के विकल्प हैं, तो दस्तावेज़ तैयार रखें।

  • बीएड धारक उम्मीदवार: पात्रता/विषयगत योग्यता के दस्तावेज़ सुदृढ़ रखें; प्रक्रिया आगे बढ़ने पर लाभ हो सकता है।

  • सभी उम्मीदवार: आधिकारिक अद्यतन/न्यायालयी आदेशों पर नज़र रखें; आवेदन/संशोधन/सत्यापन की समय-सीमाएं न चूकें।


आगे की राह

16 अक्टूबर की सुनवाई में राज्य अपने तर्क विस्तृत रूप से रखेगा। यदि अदालत NCTE अधिसूचना की बाध्यता को अंतिम रूप से बरकरार रखती है, तो कंप्यूटर विषय में बीएड अनिवार्यता बहाल रहेगी और नियम/विज्ञापन में आवश्यक संशोधन कराए जा सकते हैं। विपरीत स्थिति में राज्य को सुव्यवस्थित संक्रमणकालीन प्रावधान दर्शाने होंगे।

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