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उत्तराखंड कैबिनेट : जबरन धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, अग्निवीरों को 10% आरक्षण समेत 26 फैसलों पर मुहर

उत्तराखंड कैबिनेट : जबरन धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, अग्निवीरों को 10% आरक्षण समेत 26 फैसलों पर मुहर

हाइलाइट्स बॉक्स

  • कैबिनेट ने 26 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी

  • जबरन धर्मांतरण पर अब 20 साल से आजीवन कारावास तक की सजा

  • धर्मांतरण गतिविधियों की संपत्ति कुर्क होगी, जुर्माना 10 लाख तक

  • अग्निवीरों को सरकारी वर्दीधारी पदों पर 10% क्षैतिज आरक्षण मिलेगा

  • सेना में दी गई सेवा अवधि के बराबर अधिकतम आयु सीमा में छूट

  • सीधी भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा नहीं

  • 850 अग्निवीरों को 2026 तक आरक्षण का लाभ संभावित

  • भूमि अधिग्रहण में नैनबाग सर्किल रेट आधारित मुआवजा

  • विभागीय संरचनाएं पुनर्गठित, नई सेवा नियमावलियों को मंजूरी

उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक परिदृश्य को बदलने वाले 26 बड़े प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। सबसे चर्चित प्रस्तावों में जबरन धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक की सजा और अग्निवीरों के लिए वर्दीधारी सरकारी पदों में 10% क्षैतिज आरक्षण शामिल है। राज्य में विकास, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी हितों के लिए भी नए कदम उठाए गए हैं।


जबरन धर्मांतरण पर कठोर कानून

उत्तराखंड सरकार ने धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी देते हुए राज्य में जबरन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण रोकने के कानून को और सख्त बना दिया है। अब यदि कोई व्यक्ति जबरन, प्रलोभन, छल या बल प्रयोग से धर्मांतरण करता है तो उसे 20 साल से आजीवन कारावास तक की सजा मिल सकती है। इसके अलावा न्यूनतम सजा को भी बढ़ाकर 7 साल किया गया है।

  • जुर्माना: अब 50,000 से बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

  • धर्मांतरण गतिविधियों की संपत्ति: ऐसे अपराध में अर्जित संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार जिलाधिकारी को मिला है।

  • डिजिटल प्रलोभन: सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से धर्मांतरण कराने पर भी प्रावधान लागू होंगे।

  • विदेशी फंडिंग: धर्मांतरण के लिए विदेशी संस्थानों से फंड मिलने पर 10 लाख तक का जुर्माना।

  • अपराध की श्रेणी: सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, विचारण सत्र न्यायालय में।

धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखते हुए सरकार का कहना है कि यह कानून धोखाधड़ी व दबाव से होने वाले धर्मांतरण को रोककर सामाजिक सद्भाव को बनाए रखेगा।


अग्निवीरों को 10% क्षैतिज आरक्षण

सेना से सेवा मुक्त होने वाले अग्निवीरों को उत्तराखंड में समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों पर 10% क्षैतिज आरक्षण मिलेगा। सेना में दी गई कुल सेवा के बराबर अधिकतम आयु सीमा में छूट और भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा से मुक्त किया जाएगा।

  • लाभ पाने वाले पद: पुलिस आरक्षी, उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर, फायरमैन, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही, सचिवालय रक्षक आदि।

  • लाभ की शुरुआत: वर्ष 2026 तक सेना से रिटायर होकर लौटने वाले 850 अग्निवीरों को लाभ मिलने का अनुमान है।

  • निवास प्रमाण: लाभ पाने के लिए अभ्यर्थी का उत्तराखंड का मूल निवासी या स्थायी निवासी होना आवश्यक।

सरकार के अनुसार, यह निर्णय युवा सैनिकों के पुनःस्थापन और उनके जीवन में स्थायित्व लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


भूमि अधिग्रहण और विभिन्न विभागीय फैसले

  • लखवाड़ जल विद्युत परियोजना: प्रभावित किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा अब नैनबाग के सर्किल रेट के आधार पर मिलेगा।

  • उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम: ढांचे का पुनर्गठन किया गया।

  • सहकारिता विभागउत्तराखंड सहकारी संस्थागत सेवामंडल का गठन।

  • न्यायिक और विद्युत क्षेत्र: उच्च न्यायिक सेवा नियमावली, जल विद्युत निगम, विद्युत नियामक आयोग और पावर कॉरपोरेशन की वार्षिक रिपोर्ट व प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने का निर्णय हुआ।

  • पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार: एसजीएसटी की छूट।

  • विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीतिपशुपालन सांख्यिकी सेवावित्त सेवा नियमावलीविकास सेवाएं आदि की नई नियमावलियों पर मुहर।


अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव

  • बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में उपाध्यक्ष का एक अतिरिक्त पद।

  • नगर निकायों में ओबीसी सर्वेक्षण के लिए समर्पित आयोग का गठन।

  • उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन विधेयक को विधानसभा पटल पर रखने की मंजूरी।

  • वनीकरण निधि प्रबंधन की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर।

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