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निजी पेंशन योजनाओं में मिलेगी कर छूट

निजी पेंशन योजनाओं में मिलेगी कर छूट


हाइलाइट्स

  • निजी पेंशन फंड/स्कीम (जैसे LIC पेंशन, प्राइवेट इंस्योरर) में निवेश करने वालों को अब कम्यूटेड पेंशन (एकमुश्त निकासी) पर भी कर छूट मिल सकती है।

  • अब तक केवल सरकारी कर्मचारियों और निजी क्षेत्र के वेतनभोगियों को छूट मिलती थी, गैर-कर्मचारी/स्वरोजगार पेशेवर छूट से वंचित थे।

  • लोकसभा की समिति ने आयकर विधेयक 2025 में “रिटायरमेंट/नॉन-एम्प्लॉई” पेंशनधारकों को भी बराबर छूट देने की सिफारिश की।

  • निवेश करने वाले परिवारजन/वारिस भी अब छूट के लाभार्थी होंगे।

  • प्रस्ताव के अनुसार, अब पूरी एकमुश्त पेंशन (कम्यूटेड पेंशन) पर विशेष टैक्स डिडक्शन की अनुशंसा, जिससे टैक्स बोझ घटेगा।


पहली बार लोकसभा की स्पेशल कमेटी ने निजी पेंशन स्कीमों में निवेश करने वाले लोगों के हित में सिफारिश की है—अब पेंशन की एकमुश्त निकासी (कम्यूटेड पेंशन) पर सरकारी और प्राइवेट (निजी) या गैर-कर्मचारी निवेशकों को भी समान कर छूट मिलेगी।

अब तक की व्यवस्था

  • सरकारी कर्मचारी: कम्यूटेड पेंशन पर 100% टैक्स छूट (Income Tax Act,Section 10(10A)).

  • निजी क्षेत्र के वेतनभोगी: यदि ग्रेच्युटी मिली है तो 1/3 भाग, न मिली हो तो 1/2 भाग छूट; बाकी धनराशि कर योग्य।

  • गैर-कर्मचारी/प्राइवेट पेंशन फंड निवेशक: पूरी एकमुश्त राशि टैक्स के दायरे में आती थी.

प्रस्तावित बदलाव (Income Tax Bill 2025, समिति अनुशंसा)

  • समिति के मुताबिक, अब मान्यता प्राप्त पेंशन फंड (जैसे LIC या प्राइवेट इंश्योरर की स्कीम) में नियमित निवेश या एकमुश्त पेंशन निकासी पर भी वे ही छूट मिलेगी, जैसी वेतनभोगी को मिलती है।

  • गैर-कर्मचारी (जिनका नियोक्ता नहीं, लेकिन निजी पेंशन फंड में निवेश)—अब “Income from Other Sources” में पूरी एकमुश्त रकम पर विशिष्ट डिडक्शन की अनुशंसा, जिससे टैक्स बोझ कम/शून्य हो सकता है.

  • स्वरोजगार पेशेवर, फ्रीलांसर्स, परिवारजन/वारिस (मृतक पेंशनधारकों के): इन्हें भी समान छूट मिलेगी; पहले पूरी राशि कर योग्य थी, अब राहत मिलेगी.

  • पेंशन फंड नियमों के तहत, सभी IRDA-मान्यता प्राप्त स्कीम्स पर यह नियम लागू होगा।

कम्यूटेड पेंशन क्या है?

  • कम्यूटेड पेंशन—सेवानिवृत्ति के समय पेंशनधारी अपनी मासिक पेंशन का कुछ भाग एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी पेंशन हर माह मिलती रहती है।

  • अब तक गैर-कर्मचारी वर्ग को उस एकमुश्त भाग पर पूरी तरह टैक्स देना पड़ता था।


प्रस्तावित अन्य बदलाव

  1. केवल TDS रिफंड के लिए ITR दाखिल करने की अनिवार्यता समाप्त हो सकती है—सरल फॉर्म से काम चल सकेगा।

  2. रिटर्न आखिरी तिथि के बाद भरने पर रिफंड न देने का प्रावधान हटाने की सिफारिश—रिटायरों और वरिष्ठ नागरिकों को राहत।


इस कदम से वे सभी लोग लाभान्वित होंगे, जो नौकरी में न रहते हुए व्यक्तिगत तौर पर इलेक्ट्रॉनिक या पारंपरिक पेंशन स्कीमों में निवेश करते हैं।

  • स्वरोजगार (Self-employed), किसान, छोटे व्यापारी, फ्रीलांसर के लिए अब रिटायरमेंट के समय टैक्स का बोझ काफी घटेगा।

  • मृतक पेंशनधारकों के वारिस को भी राहत—विरासत में मिली पेंशन एकमुश्त निकालने पर कर छूट।

कर व्यवस्था में यह संशोधन निजी पेंशन योजनाओं को ज्यादा आकर्षक और न्यायसंगत बनाएगा। अब सिर्फ सरकारी या बड़ी कंपनियों के वेतनभोगियों को नहीं, बल्कि आम निवेशक/स्वरोजगार व्यक्ति भी सुरक्षित और टैक्स-फ्रेंडली रिटायरमेंट प्लानिंग कर सकेगा।
आम लोगों, छोटे कारोबारी, और परिवारजन—सभी को अब पेंशन निकासी के समय टैक्स में छूट की समान अधिकार मिलेगा।


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